कन्या पूजन

आज नन्ही पायल बहुत खुश थी.  सुबह से अपनी माँ को हज़ार बार याद दिला चुकी थी की वह उसका लहंगा निकाल कर रखे.  महज़ नौ साल की थी पायल.  उसे साल में दो बार ही तो इतना ख़ास महसूस कराया जाता.  उसका जन्मदिन भी सिर्फ उसकी माँ ही मनाती. आज उसे पांच घरों में कन्या पूजन के लिए बुलाया गया था.  नवरात्रों में उसे यह दिन बहुत अच्छे लगते हैं.  जिसके भी घर जाती वहां उसे प्यार से बिठाया जाता, पूजा की जाती, अच्छा अच्छा खाना खिलाया जाता, तोहफे दिए जाते.

पायल की माँ सीमा सुबह से नवरात्रों के आयोजन में लगी हुई थी.  सुबह ५ बजे से उठकर पूजा पाठ किया, सबके लिए नाश्ता बनाया, व्रत का खाना बनाया, और अब कन्या पूजन की तैयारियों में जुटी हुई थी.  किसीको यह ख्याल नहीं आया की वह ६ महीने की गर्भवती है.  उसकी सास उसे सुबह से बस आदेश और तानें दिए जा रही थी.

सभी ने इस बार देवी माँ से यही मन्नत मांग राखी थी की इस बार सीमा को बेटा हो.  आखिर बहुत मुश्किलों के बाद वह दोबारा माँ बनने वाली थी.  पायल के पैदा होने के बाद से ही उस पर बेटा पैदा करने का दबाव डाला जा रहा था.  पर किसी वजह से वह फिर से माँ नहीं बन पा रही थी.  इसलिए जब नौ साल बाद वह फिर से माँ बननेवाली थी तब सभी ने बस एक ही गुहार लगा रखी थी.  इस बार तो बेटा ही होना चाहिए.  किसी ने कुछ मंत्र दिए, किसीने तावीज़, किसीने कुछ खाने को बोला, किसीने कुछ न करने को बोले, पर किसीने सीमा की भावनाओं की परवाह नहीं की.  किसीने उसका ख्याल नहीं रखा.  आज सुबह से उसे बहुत थकान महसूस हो रही थी पर किसीने उसे एक गिलास पानी तक नहीं पूछा.

मन ही मन वह हंसी, “वाह रे समाज! क्या दोगलापन है तेरा.  एक तरफ देवी माँ की पूजा कर रहे हो, कन्या पूजन कर रहे हो और दूसरी तरफ एक औरत का तिरस्कार कर रहे हो, एक अजन्मे बच्चे के लिए यह प्रार्थना कर रहे हो की वह बेटी न पैदा हो.  क्या यही बेहतर नहीं होगा की एक जीती जागती कन्या को साल में दो दिन न पूजकर रोज़ उसे सम्मान दिया जाए, उसके जन्म पर खुशियां मनाई जाए?  देवियों को जितना पूजा जाता है उसका आधा मान भी घर की बेटी और बहुओं को दिया जाए?”

तभी नन्ही पायल सज धज कर सीमा के सामने आई और मुस्कुरा कर पूछा, “माँ, मैं कैसी लग रही हूँ? जब मेरी बहन आएगी तब उसकी भी पूजा होगी ना?”

सीमा ने प्यार से पायल का माथा चूमा और ढृढ़ होकर बोली, “हाँ, अगर तेरी बहन आई तो उसकी भी पूजा होगी, हम दोनों करेंगे, सिर्फ दो दिन नहीं सारी ज़िंदगी के लिए मैं तुम दोनों का कन्या पूजन करुँगी.”

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